
उज्जैन। पूज्य डॉ. मुक्तिसागर जी महाराज साहब, मुनि अचल मुक्तिसागर जी महाराज साहब एवं साध्वी मंडल की पावन निश्रा में उज्जैन नगर की पुण्य एवं धन्य धरा स्थित खंडेलवाल नगर में निर्माणाधीन श्री लक्ष्मी वर्धक पार्श्वनाथ भगवान का भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव तथा श्री नवपद आश्रय में गृह प्रवेश समारोह श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर चोरड़िया परिवार एवं श्रीमाल परिवार द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य डॉ. मुक्तिसागर जी महाराज साहब ने धर्मध्वजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ध्वजा धर्म, आस्था, विजय एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। धर्मध्वजा सदैव मनुष्य को सत्य, अहिंसा, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है तथा जहां धर्मध्वजा फहराती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक संस्कारों का वातावरण निर्मित होता है।
महोत्सव के दौरान चोरड़िया परिवार एवं श्री श्रीमाल परिवार द्वारा गुरुदेव को श्रद्धापूर्वक कमली अर्पित की गई। साथ ही प्रतिष्ठा महोत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने वाले समाजजनों एवं कार्यकर्ताओं का सम्मान एवं बहुमान भी किया गया।
प्रतिष्ठा महोत्सव के समस्त धार्मिक अनुष्ठान विधिकारक पंकज नवलखा (झाड़ला) के निर्देशन में सम्पन्न हुए। विधि-विधान में सुजानमल रजावत, वैभव डांगी, लोकेश सालेचा, चंद्रेश मारु एवं तनिष्क मारु ने विशेष सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम में संगीत की मधुर प्रस्तुति संजय छाजेड़ (सुवासरा) एवं राज मोदी (उज्जैन) द्वारा दी गई, जिससे आयोजन का धार्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय बन गया।
वहीं अंजनशलाका नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति नृत्य निर्देशिका दीपिका मेहता (इकलेरा/उज्जैन) के निर्देशन में संपन्न हुई, जिसकी श्रद्धालुओं ने सराहना की। इस अवसर पर चोरड़िया एवं श्री श्रीमाल परिवार ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे अंतर्मन में जागृत इस पावन भावना को अभ्युदयपुरम तीर्थ प्रेरक, मालव मार्तंड, परम पूज्य आचार्य देवेश डॉ. मुक्तिसागरसूरिश्वरजी महाराज साहब की पावन निश्रा एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। साथ ही हमारे परिवार के परम उपकारी पंजाब केसरी परम पूज्य आचार्य देवेश श्रीमद् विजय वल्लभ सूरिश्वरजी महाराज साहब की परंपरा, समुदायवर्तिनी परम पूज्या शीलपूर्णाश्रीजी महाराज साहब तथा परिवार के वडिलजनों के आशीर्वाद से यह पुण्य भावना साकार रूप ले सकी।












