- उज्जैन, न्यूज़, विडियो, विदेश, शहर

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय माधव महाविद्यालय उज्जैन में दो दिवसीय द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ

Spread the love

उज्जैन /प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय माधव महाविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.) में दो दिवसीय ‘द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति कॉन्फ्रेंस’ का गरिमामय एवं भव्य शुभारंभ हुआ। 23 एवं 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय “Sustainable Resource Management and Ecological Resilience: Global Pathway to VIKSHIT BHARAT – 2047” रखा गया है।
यह आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के सौजन्य से पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ ज्योग्राफी एवं रिसर्च सेंटर/IQAC द्वारा ‘प्रकृति रिसर्च सोसाइटी, उदयपुर (राजस्थान)’ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में चेयरमैन एवं संयोजक (Chairman and Convener) डॉ. मोहन निमोले द्वारा कॉन्फ्रेंस की संपूर्ण रूपरेखा एवं विषय की प्रासंगिकता प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही उन्होंने मंच पर उपस्थित सभी आमंत्रित अतिथियों का संक्षिप्त परिचय देकर उनका हार्दिक अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. आलोक श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रकृति शोध संस्थान, उदयपुर के संस्थापक एवं एवं अध्यक्ष डॉ. पी. आर. व्यास ने कहा कि सूखते जंगल, उड़ती धूप और बढ़ते कचरे का समाधान करना चाहिए । उन्होंने संस्थान के उद्देश्यों और सतत विकास में प्रकृति शोध की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य वक्ता प्रो. पृथ्वीश नाग ने अपने विशेष उद्बोधन में कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए सतत संसाधन प्रबंधन (Sustainable Resource Management) और पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological Resilience) सबसे महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

महाविद्यालय की प्राचार्य एवं कार्यक्रम की संरक्षक प्रो. कल्पना वीरेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में अतिथियों और शोधार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कॉन्फ्रेंस एक समसामयिक विषय पर आधारित है । महाविद्यालय में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों में वैश्विक सोच का विकास होता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखना हम सभी का नैतिक दायित्व है और इस दिशा में यह कॉन्फ्रेंस एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

सत्र के दौरान प्रो. देवेंदर कौर बग्गा एवं प्रो. एम. एस. पंवार द्वारा भी अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए गए। उन्होंने पर्यावरण सरंक्षण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन साधने के विषय पर अपने अनुभव और शोध दृष्टिकोण साझा किए।
संचालन किया प्रो राजश्री सेठ ने ।

आभार इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की आयोजन सचिव (Organising Secretary) डॉ. प्रमिला बघेल तथा सह-संयोजक (Co-Convener) डॉ. गणेश राठौर द्वारा किया गया । उनके द्वारा सभी अतिथियों, विद्वानों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया । इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का समापन 24 अक्टूबर को किया जाएगा । इसमें देश-विदेश के शोधार्थियों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे । यह जानकारी डॉक्टर रफीक नागोरी ने दी।