
लवनीश अग्रवाल के साथ डॉ.गौरव पेड़वा
उज्जैन /सम्राट विक्रमादित्य भवन उज्जैन में आयोजित अखिल भारतीय बालिका शिक्षा कार्यशाला का उद्घाटन आज प्रातः संपन्न हुआ । उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विद्या भारती के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री यतींद्र शर्मा, अध्यक्ष केंद्रीय महिला विकास मंत्री सावित्री ठाकुर, बालिका शिक्षा अ. भा. संयोजक सुश्री रेखा चुडासमा, तथा विशिष्ट अतिथि सह संयोजक श्रीमती प्रमिला शर्मा के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए यतीन्द्र ने कहा कि स्वतंत्र भारत में शिक्षा की दशा एवं दिशा ठीक करने हेतु विद्या भारती की स्थापना 1952 गोरखपुर में की गई। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रेरणा से हम कार्य कर रहे हैं। विद्या भारती कार्यकर्ताओं ने धीरे धीरे बालिका शिक्षा का विस्तार किया है। आपातकाल के बाद विद्या भारती एवं बालिका शिक्षा की व्यवस्थित रूपरेखा बनी। बालक बालिकाओं के नैसर्गिक गुणों को ध्यान में रखते हुए, वेदों में उल्लेखित विदुषियों के ज्ञान को ध्यान में रखते हुए बालिका शिक्षा का पाठ्यक्रम बनाया गया है। बालिका ही आगे चलकर माता के रूप में परिवार का लालन पालन करते हुए नेतृत्व करती हैं। मुगलों, अंग्रेजों के शासन में भारत में पुरुष प्रधान समाज की भावना बढ़ी। आज हम फिर से मातृ शक्ति को प्रतिष्ठित कर रहे। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बालिकाओं के समग्र विकास एवं नेतृत्व कौशल के विकास हेतु विचार कर पाठ्यक्रम एवं कार्यक्रमों की योजना बनाना आज की आवश्यकता है। विद्या भारती बालिकाओं के पृथक एवं सह शिक्षा दोनों पद्मतियों के विद्यालय संचालित करती है।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने शिक्षा व संस्कार दोनों होने पर समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनते हैं। प्रधानमंत्री मोदी महिला सशक्तिकरण के पक्षधर हैं। माँ सबसे पहली गुरु होती है और बालिका शिक्षा से श्रेष्ठ, संस्कारयुक्त मातृत्व भाव का जागरण संभव है। आज मातृभाषा और मातृत्व को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी समझते हुए संस्कारयुक्त बालिका शिक्षा देना हमारा कर्तव्य है।
श्रीमती ठाकुर ने अपने जीवन के अनुभव बताते हुए कहा कि पिता की मृत्यु के बाद मेरी माँ ने हम चार बहनों को पढाया, हमने खेती की और अपने पैरों पर खड़े हुई। अनपढ़ माता ने मुझे इस योग्य बनाया कि मैं आंगनबाड़ी में काम करने लायक बन गई और मेहनत करते हुए आज राजनीति में केंद्रीय मंत्री तक पहुंची।
प्रधानमंत्री शौचालय निर्माण, मॉडल स्कूल इत्यादि के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा की चिंता कर रहे। बचत समूहों से महिला सशक्तिकरण होता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से संस्कारयुक्त शिक्षा की पहल की है। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है, इन्हें और कड़ा किया जावेगा।
कार्यक्रम में सम्मुख उपस्थित रहे बालिका शिक्षा के अ भा. प्रभारी अवनीश भटनागर, मध्य क्षेत्र संगठन मंत्री अखिलेश मिश्रा, प्रांत संगठन मंत्री योगेश शर्मा, अ. भा. मधु साव, क्षेत्र सह मंत्री श्रीमती हिना नीमा, प्रांत उपाध्यक्ष श्रीमती डॉली गिरी गोस्वामी, प्रांत सह सचिव अनुराग जैन, प्रांत प्रमुख पंकज पवार, प्रशिक्षण निदेशक डॉ. रविंद्र शर्मा, महाप्रबंधक महेश गुप्ता, विभाग समन्वयक विष्णु श्रोत्रिय।
प्रस्तावना अ. भा. सह संयोजक श्रीमती पवित्रा दहल ने रखी एवं संचालन अ. भा. सह संयोजक श्रीमती सुनीता पांडेय ने किया
इस कार्यशाला में भारत के विभिन्न प्रदेशों से 100 से अधिक प्रतिभागी बहनें भाग ले रही हैं।












