उज्जैन/मालवा की पवित्र धार्मिक नगरी उज्जैन में सामाजिक समरसता और आत्मीयता के प्रतीक रहे स्वर्गीय तुलसीराम रावल जी की प्रथम पुण्यतिथि अत्यंत गरिमामयी और भावपूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस पुनीत अवसर पर रावल द्वारा एक विशाल भजन संध्या एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित परिजनों, समाज के प्रबुद्ध जनों और वरिष्ठ नागरिकों ने स्वर्गीय तुलसीराम रावल जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वलित कर अपनी पुष्पांजलि अर्पित की।
*भजनों के माध्यम से गूंजा जीवन का शाश्वत सत्य*
श्रद्धांजलि सभा को सुरमयी रूप देते हुए सुप्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी मधुर आवाज से समां बांध दिया। भजन संध्या में जब संसार की नश्वरता को दर्शाता प्रसिद्ध भजन “जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी, देख तमाशा लकड़ी का” प्रस्तुत किया गया, तो वहां उपस्थित हर आंख नम हो गई। इसके पश्चात स्वर्गीय रावल जी की स्मृतियों को जीवंत करते हुए “चिट्ठी ना कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए” जैसे मर्मस्पर्शी भजनों की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक बना दिया। उपस्थित जनसमुदाय ने भी सुर में सुर मिलाकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
*समाज के वरिष्ठ जन एवं प्रबुद्ध नागरिक रहे उपस्थित*
स्वर्गीय तुलसीराम रावल जी के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए आयोजन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक और वरिष्ठ जन बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। इस स्मृति सभा में मुख्य रूप से नरेंद्र कुमार पेड़वा,संतोष रावल, राजेंद्र पेड़वा, मनोहर ललावत, राजेश पेड़वा, शैलेंद्र रावल, ऋषभ पेड़वा, देव जी रावल,कमल गोठवाल, कमलेश टेम्भरे, मनोज मिश्रा, ऋषि राठौर, मोनू रावल, देवेंद्र बड़गोतिया, ऋषि रावल, कुशाग्र पेड़वा एवं राजवीर रावल सहित रावल एवं पेड़वा परिवार के तमाम सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनों ने स्वर्गीय रावल जी के सरल स्वभाव और समाज हित में किए गए कार्यों को याद करते हुए उन्हें दो मिनट का मौन रखकर मौन श्रद्धांजलि भी दी।












