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राष्ट्र और समाज केंद्रित जीवन से ही तनाव मुक्त जीवन संभव:- स्ट्रेस गुरु प्रो. सक्सेना

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सकारात्मक भावदशा से किया गया कठिन से कठिन और बड़ा काम भी आपको तनाव मुक्त रखता है

उज्जैन/उक्त उदगार स्ट्रेस गुरु के नाम से प्रसिद्ध प्रोफेसर विष्णु नारायण सक्सेना ने महाकाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एवं मैनेजमेंट में मानसिक स्वास्थ जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत तनाव प्रबंधन विषय पर व्याख्यान के दौरान व्यक्त किए।प्रोफेसर सक्सेना ने बताया कि आज तनाव व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करके समाज और हमारे राष्ट की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर रहा है। इसलिए आज हमारा कर्तव्य है कि हम तनाव मुक्त जीवन जी कर के अपनी पूरी कार्यक्षमता से अपने समाज और देश के लिए कार्य करे।
प्रोफेसर सक्सेना ने उक्त अवसर पर बताया कि व्यक्ति जैसे जैसे आत्म केंद्रित जीवन के जगह समाज केंद्रित, राष्ट केंद्रित और मानवता केंद्रित जीवन जीना शुरू करता है, उसका तनाव स्वतः ही समाप्त होने लगता है। स्ट्रेस गुरु ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब महात्मा गांधी जी विदेश से वकालत की पढ़ाई करने के बाद पहली बार अदालत में अपनी स्वयं की रोजी रोटी के लिए खड़े हुए तो उनके हाथ पैर कांपने लगे और उनकी जुबान लड़खड़ाने लगी और वह अपने मुकविल के पक्ष में दलीलों को पेश ही नहीं कर पाए, लेकिन जब वही महात्मा गांधी भारत माता की आजादी के लिए खड़े हुए तब उनकी वही आवाज करोड़ों लोगों में क्रांति और प्रेरणा की वजह बन गई।
प्रोफेसर सक्सेना ने आगे बताया की आप अपने जीवन में क्या करना चाहते है उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने जीवन में कोई चीज क्यों करना चाहते है। कोई भी कार्य करने के पीछे की असली वजह क्या है या आपका कोई भी उ‌द्देश्य किस तरह की भावनाओं से प्रेरित है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए जब आप अपने निजी लाभ या लालच के लिए किसी से कोई छोटी सी लड़ाई भी लड़ते है तो वह आपको भयभीत कर देती है लेकिन जब हमारे देश के सैनिक अपने देश के गर्व गौरव की रक्षा के लिए कर्तव्य बोध से बड़ी से बड़ी जंग अपनी जान को हथेली पर रख कर भी लड़ते है तो उन्हें लेश मात्र भी भय नहीं छूता।
विष्णु नारायण सक्सेना ने बताया कि सिर्फ आत्मकेंद्रित छोटी समस्याएं ही हमारे अधिकांश दुखों एवं तनाव की वजह बनता है जब हम अपने समाज, देश और मनुष्यता की समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रयत्नशील होते है तो तनाव हमे छू भी नहीं पाता बल्कि बड़ी चुनौतियों का सामना करने से हमारे व्यक्तित्व निखर जाता है।
प्रोफेसर सक्सेना ने उक्त अवसर पर बताया कि मनुष्य का सबकांशियस माइंड का प्रमुख कार्य हमे संभावित खतरे के प्रति आगाह करना होता है ताकि हम सरवाइव कर सके इसीलिए हमारा सबकॉन्शियस माइंड खतरों तथा नकारात्मक विचारों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है।
यही कारण है कि नकारात्मक घटनाएं, व्यक्ति एवं विचार अनावश्यक रूप से हमारे दिमाग में बिना बुलाए ही आते रहते है। जबकि सकारात्मक व्यक्तियों घटनाओं एवं विचारों के बारे में हमें प्रयास पूर्वक सचेतन रूप से सोचने की जरूरत पड़ती है। स्ट्रेस गुरु ने तनाव प्रबंधन के अपने प्रैक्टिकल सेशन में प्राध्यापको एवं छात्र छात्राओं को सांसो को नियंत्रित करके, बॉडी लैंग्वेज को बदल कर के, आहार तथा भावनात्मक पैटर्न को परिवर्तित करके एवं सबकॉन्शियस माइंड को रीप्रोग्राम करके तनाव प्रबंधन की अनेक विधियों का अभ्यास भी करवाया गया । इस अवसर पर मुख्य रूप से महाकाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के नोडल ऑफिसर प्रोफेसर यशोवर्धन केलकर, महाकाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट की नोडल अधिकारी प्रोफेसर दीपाली केलकर काउंसलर प्रोफेसर पदमा जोशी, प्रोफेसर अमित सरिया प्रोफेसर प्रिया दोहरे सहित सहित करीब 300 छात्र छात्राएं उपस्थित थे।