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उज्जवला गैस कनेक्शन में धांधली की जांच हेतु एडीएम के बाबू ने ली 20 हजार की रिश्वत

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उज्जैन/ कलेक्टर कार्यालय में रिश्वतखोरी किस हद तक अपने पैर पसार चुकी है, इसका उदाहरण आज एडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर के कार्यालय में पदस्थ बाबू को लोकायुक्त ने 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर  बेनकाब किया है। मामला प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के गैस कनेक्शन में हुए फर्जीवाड़े से जुड़ा है। लेकिन जहां सवाल यह उठता है कि क्या बाबू ने सब विवेक से स्वयं के लिए यह रिश्वत ली थी या फिर अधिकारी को खुश रखने के लिए रिश्वत ली है। इस मामले में जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल ने एडीएम को भी सह-आरोपी बनाने की मांग कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

50 की मांग रखी 20 हजार लेते धराया

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार नागदा के बिरलाग्राम निवासी बृजेश विश्वकर्मा ने शिकायत की थी कि उनकी मां के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन किसी अन्य व्यक्ति के नाम जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, उस कनेक्शन पर 14 सिलेंडर भी दूसरे व्यक्ति को डिलीवर कर दिए गए, जबकि उनकी मां को कनेक्शन नहीं मिला। जनसुनवाई में शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने जांच कर रिपोर्ट एडीएम कार्यालय भेजी थी। यहाँ प्रकरण में कार्रवाई और फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर बाबू रोहित गोठवाल ने 50 हजार रुपए मांगे रखी। इस पूरे प्रकरण में लोकायुक्त एसपी विनोद कुमार दीक्षित से शिकायत के बाद आज निरीक्षक दीपक शेजवार के नेतृत्व में टीम ने ट्रैपिंग कार्रवाई की। जिसमे  20 हजार रुपए लेते ही बाबू श्री गोठवाल को रँगे हाथो पकड़ लिया गया। उसने रकम हाथ में लेने के बजाय कार्यालय की दराज में रखवाई थी। लोकायुक्त पुलिस ने घटनास्थल पर साक्ष्यप जुटाते हुए पंचनामें की कार्रवाई की है।

एडीएम की भूमिका की भी जांच होना चाहिए

जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष पोरवाल ने सवाल उठाया कि सक्षम अधिकारी के संरक्षण में ही कर्मचारी किसी प्रकरण में राहत दिलाने के नाम पर इतनी बड़ी रकम मांग सकता है। एडीएम श्री गुर्जर की भूमिका को जांच के दायरे में लेना चाहिए ।हालांकि एडीएम की संलिप्तता अभी साबित नहीं हुई है। यह आरोप और जांच का विषय है। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस ने रोहित गोठवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई कर जांच शुरू कर दी है।