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उज्जैन में साध्वी मंडल का भव्य स्वागत, धर्मसभा में दिया आत्मकल्याण का संदेश

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उज्जैन। जैन समाज के लिए बुधवार का दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा। पूज्य साध्वी श्री उपेन्द्रप्रज्ञाश्रीजी म.सा. के सान्निध्य में श्री सुहितरत्नाश्रीजी म.सा., श्री सुरभिरत्नाश्रीजी म.सा. एवं श्री सुप्रितरत्नाश्रीजी म.सा. सहित चार ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। संजय कुमार चंद्रकांतजी खिमसरिया परिवार के निवास, पार्श्वनाथ परिसर, सूरज नगर से प्रारंभ हुई मंगल प्रवेश यात्रा में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने जयघोष, धर्मध्वज, मंगल गीत एवं पुष्पवर्षा के साथ साध्वी मंडल का भावपूर्ण स्वागत किया। शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई श्री विजयहीर बड़ा उपाश्रय पहुंची, जहां धर्मसभा आयोजित की गई।
धर्मसभा में साध्वी श्री ने कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक बनता है जब वह अपने आचरण को धर्ममय बनाए। उन्होंने कहा कि साधु-साध्वियों की अंतरंग वाणी का अध्ययन करना, बड़ों का आदर-सत्कार करना, प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान करना तथा नवकार मंत्र के आदर्शों को जीवन में अपनाना ही सच्चे धर्म की पहचान है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने वचन, मन और धन की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को सबसे पहले अपने वचनों को मधुर और संयमित बनाना चाहिए, क्योंकि कटु वचन रिश्तों में दूरी पैदा करते हैं, जबकि मधुर वाणी प्रेम और विश्वास बढ़ाती है। मन की शुद्धि के लिए सकारात्मक चिंतन, सद्भावना और धर्म आराधना आवश्यक है। वहीं धन तभी सार्थक है जब उसका उपयोग धर्म, सेवा, परोपकार एवं जरूरतमंदों की सहायता में किया जाए। उन्होंने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति स्वयं भी सुखी रहता है और समाज को भी सही दिशा देता है।
इस अवसर पर विधायक अनिल जैन एवं रवि सोलंकी ने धर्मसभा में उपस्थित होकर साध्वी मंडल के दर्शन किए एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। बड़ी संख्या में समाजजनों ने भी धर्मसभा में सहभागिता कर आध्यात्मिक संदेशों का लाभ लिया।
धर्मसभा के पश्चात महिला मंडल द्वारा श्री पार्श्वनाथ पंचकल्याणक पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई। आयोजन समिति ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि पूरा कार्यक्रम अनुशासन, श्रद्धा और भक्तिभाव के वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।